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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.25
(26 verses)
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Sanskrit Text
यः
सर्वलोकद्वाराणि
नित्यं
संचरते
वशी
।
देवलोकाद्ब्रह्मलोकं
गन्धर्वाप्सरसामपि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
इमानि | लोक + द्वार | यो | वै | संचरते | सदा
देव + लोक | ब्रह्मन् + लोक | संचरन् | पुण्य + कृत् | वशी
देव + लोक | ब्रह्मन् + लोक | संचरन् | पुण्य + कृत् | वशी