Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.164
(58 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
नित्यपुष्पफलास्तत्र
पादपा
हरितच्छदाः
।
पुष्करिण्यश्च
विविधाः
पद्मसौगन्धिकायुताः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
दिव्य + पुष्प + फल | तत्र | पादपा | हरित + छद
तां | तु | पुष्करिणीं | रम्यां | पद्म + सौगन्धिक + आयुत
तां | तु | पुष्करिणीं | रम्यां | पद्म + सौगन्धिक + आयुत