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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.157
(70 verses)
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Sanskrit Text
सेन्द्राशनिरिवेन्द्रेण
विसृष्टा
वातरंहसा
।
हत्वा
रक्षः
क्षितिं
प्राप्य
कृत्येव
निपपात
ह
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स + इन्द्र + अशनि | इव + इन्द्र | विसृष्टा | वात + रंहस्
हत्वा | रक्षः | क्षितिं | प्राप्य | कृत् + इव | निपपात | ह
हत्वा | रक्षः | क्षितिं | प्राप्य | कृत् + इव | निपपात | ह