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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.105
(25 verses)
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Sanskrit Text
ततस्ते
सागरास्तात
हृतं
मत्वा
हयोत्तमम्
।
आगम्य
पितुराचख्युरदृश्यं
तुरगं
हृतम्
।
तेनोक्ता
दिक्षु
सर्वासु
सर्वे
मार्गत
वाजिनम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततस् | ते | सागरास् | तात | हृतं | मत्वा | हय + उत्तम
आगम्य | पितुर् | आचख्युर् | अदृश्यं | तुरगं | हृतम्
तद् + वच् | दिक्षु | सर्वासु | सर्वे | मार्गत | वाजिनम्
आगम्य | पितुर् | आचख्युर् | अदृश्यं | तुरगं | हृतम्
तद् + वच् | दिक्षु | सर्वासु | सर्वे | मार्गत | वाजिनम्