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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.68
(46 verses)
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Sanskrit Text
क्रूर
पापजनैर्जुष्टमकृतार्थं
प्रभाषसे
।
गान्धारविद्यया
हि
त्वं
राजमध्ये
विकत्थसे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
क्रूर | पाप + जन | जुष्टम् | अकृतार्थं | प्रभाषसे
गान्धार + विद्या | हि | त्वं | राजन् + मध्य | विकत्थसे
गान्धार + विद्या | हि | त्वं | राजन् + मध्य | विकत्थसे