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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.68
(46 verses)
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Sanskrit Text
सूक्ष्मान्प्रावारानजिनानि
चोदिता;न्दृष्ट्वारण्ये
निर्धनानप्रतिष्ठान्
।
कां
त्वं
प्रीतिं
लप्स्यसे
याज्ञसेनि;
पतिं
वृणीष्व
यमिहान्यमिच्छसि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सूक्ष्मान् | प्रावारान् | अजिनानि | चोदितान् | दृश् + अरण्य | निर्धनान् | अप्रतिष्ठान्
कां | त्वं | प्रीतिं | लप्स्यसे | याज्ञसेनि | पतिं | वृणीष्व | यम् | इह + अन्य | इच्छसि
कां | त्वं | प्रीतिं | लप्स्यसे | याज्ञसेनि | पतिं | वृणीष्व | यम् | इह + अन्य | इच्छसि