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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.58
(43 verses)
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Sanskrit Text
तयैवंविधया
राजन्पाञ्चाल्याहं
सुमध्यया
।
ग्लहं
दीव्यामि
चार्वङ्ग्या
द्रौपद्या
हन्त
सौबल
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तद् + एवंविध | राजन् | पाञ्चाली + मद् | सु + मध्य
ग्लहं | दीव्यामि | चारु + अङ्ग | द्रौपद्या | हन्त | सौबल
ग्लहं | दीव्यामि | चारु + अङ्ग | द्रौपद्या | हन्त | सौबल