Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.58
(43 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
बहु
वित्तं
पराजैषीः
पाण्डवानां
युधिष्ठिर
।
आचक्ष्व
वित्तं
कौन्तेय
यदि
तेऽस्त्यपराजितम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
कथं | काल + वश | प्राप्तः | पाण्डवेयो | युधिष्ठिरः
आचक्ष्व | वित्तं | कौन्तेय | यदि | ते | अस् + अपराजित
आचक्ष्व | वित्तं | कौन्तेय | यदि | ते | अस् + अपराजित