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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.57
(21 verses)
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Sanskrit Text
अहं
कर्तेति
विदुर
मावमंस्था;
मा
नो
नित्यं
परुषाणीह
वोचः
।
न
त्वां
पृच्छामि
विदुर
यद्धितं
मे;
स्वस्ति
क्षत्तर्मा
तितिक्षून्क्षिणु
त्वम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अहं | कृ + इति | विदुर | मा + अवमन् | मा | नो | नित्यं | परुष + इह | वोचः
न | त्वां | पृच्छामि | विदुर | यद् + हित | मे | स्वस्ति | क्षत्तर् | मा | तितिक्षून् | क्षिणु | त्वम्
न | त्वां | पृच्छामि | विदुर | यद् + हित | मे | स्वस्ति | क्षत्तर् | मा | तितिक्षून् | क्षिणु | त्वम्