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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.57
(21 verses)
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Sanskrit Text
वैचित्रवीर्यस्य
यशो
धनं
च;
वाञ्छाम्यहं
सहपुत्रस्य
शश्वत्
।
यथा
तथा
वोऽस्तु
नमश्च
वोऽस्तु;
ममापि
च
स्वस्ति
दिशन्तु
विप्राः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
वैचित्रवीर्य + तु | नृपो | निशम्य | विदुरस्य | तत्
यथा | तथा | वो | ऽस्तु | नमस् + च | वो | ऽस्तु | मद् + अपि | च | स्वस्ति | दिशन्तु | विप्राः
यथा | तथा | वो | ऽस्तु | नमस् + च | वो | ऽस्तु | मद् + अपि | च | स्वस्ति | दिशन्तु | विप्राः