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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.57
(21 verses)
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Sanskrit Text
सुविज्ञेयः
पुरुषोऽन्यत्रकामो;
निन्दाप्रशंसे
हि
तथा
युनक्ति
।
जिह्वा
मनस्ते
हृदयं
निर्व्यनक्ति;
ज्यायो
निराह
मनसः
प्रातिकूल्यम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सु + विज्ञा | पुरुषो | अन्यत्र + काम | निन्दा + प्रशंसा | हि | तथा | युनक्ति
जिह्वा | मनस् + त्वद् | हृदयं | निर्व्यनक्ति | ज्यायो | निराह | मनसः | प्रातिकूल्यम्
जिह्वा | मनस् + त्वद् | हृदयं | निर्व्यनक्ति | ज्यायो | निराह | मनसः | प्रातिकूल्यम्