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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.57
(21 verses)
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Sanskrit Text
न
वासयेत्पारवर्ग्यं
द्विषन्तं;
विशेषतः
क्षत्तरहितं
मनुष्यम्
।
स
यत्रेच्छसि
विदुर
तत्र
गच्छ;
सुसान्त्वितापि
ह्यसती
स्त्री
जहाति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | वासयेत् | पारवर्ग्यं | द्विषन्तं | विशेषतः | क्षत्तर् | अहितं | मनुष्यम्
स | यत्र + इष् | विदुर | तत्र | गच्छ | सु + सान्त्वय् + अपि | हि + असत् | स्त्री | जहाति
स | यत्र + इष् | विदुर | तत्र | गच्छ | सु + सान्त्वय् + अपि | हि + असत् | स्त्री | जहाति