Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.11
(73 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
एतत्संचिन्त्य
राजेन्द्र
यत्क्षमं
तत्समाचर
।
अप्रमत्तोत्थितो
नित्यं
चातुर्वर्ण्यस्य
रक्षणे
।
भव
एधस्व
मोदस्व
दानैस्तर्पय
च
द्विजान्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एतत् | संचिन्त्य | राजन् + इन्द्र | यत् | क्षमं | तत् | समाचर
एवं | यो | वर्तते | राजा | चातुर्वर्ण्यस्य | रक्षणे
भव | एधस्व | मोदस्व | दान + तर्पय् | च | द्विजान्
एवं | यो | वर्तते | राजा | चातुर्वर्ण्यस्य | रक्षणे
भव | एधस्व | मोदस्व | दान + तर्पय् | च | द्विजान्