Vidya Kendra
Mahābhārata
Home Introduction Reader Glossary All Resources
Vidyakendra
Vidyakendra Home

Navigate to Verse

Currently viewing: Parva 2 - Chapter 2.11 (73 verses)
Powered by Aksharamukha

Search Mahābhārata

Try searching for: dharma, युद्ध, Arjuna, 1.1.5 (verse reference)
Quick Navigation: Start Browse Parvas
❖ ❖ ❖

Chapter 2.11

पुरा देवयुगे राजन्नादित्यो भगवान्दिवः आगच्छन्मानुषं लोकं दिदृक्षुर्विगतक्लमः
View Padaccheda
पुरा | देव + युग | राजन्न् | आदित्यो | भगवान् | दिवः
आगम् + मानुष | लोकं | दिदृक्षुर् | विगम् + क्लम
चरन्मानुषरूपेण सभां दृष्ट्वा स्वयंभुवः सभामकथयन्मह्यं ब्राह्मीं तत्त्वेन पाण्डव
View Padaccheda
चर् + मानुष + रूप | सभां | दृष्ट्वा | स्वयंभुवः
सभाम् | कथय् + मद् | ब्राह्मीं | तत्त्वेन | पाण्डव
अप्रमेयप्रभां दिव्यां मानसीं भरतर्षभ अनिर्देश्यां प्रभावेन सर्वभूतमनोरमाम्
View Padaccheda
अप्रमेय + प्रभा | दिव्यां | मानसीं | भरत + ऋषभ
अनिर्देश्यां | प्रभावेन | सर्व + भूत + मनोरम
श्रुत्वा गुणानहं तस्याः सभायाः पाण्डुनन्दन दर्शनेप्सुस्तथा राजन्नादित्यमहमब्रुवम्
View Padaccheda
श्रुत्वा | गुणान् | अहं | तस्याः | सभायाः | पाण्डु + नन्दन
दर्शन + ईप्सु + तथा | राजन्न् | आदित्यम् | अहम् | अब्रुवम्
भगवन्द्रष्टुमिच्छामि पितामहसभामहम् येन सा तपसा शक्या कर्मणा वापि गोपते
View Padaccheda
भगवन् | द्रष्टुम् | इच्छामि | पितामह + सभा | अहम्
येन | सा | तपसा | शक्या | कर्मणा | वा + अपि | गोपते
औषधैर्वा तथा युक्तैरुत वा मायया यया तन्ममाचक्ष्व भगवन्पश्येयं तां सभां कथम्
View Padaccheda
औषधैर् | वा | तथा | युक्तैर् | उत | वा | मायया | यया
तद् + मद् + आचक्ष् | भगवन् | पश्येयं | तां | सभां | कथम्
ततः भगवान्सूर्यो मामुपादाय वीर्यवान् अगच्छत्तां सभां ब्राह्मीं विपापां विगतक्लमाम्
View Padaccheda
ततः | स | भगवान् | सूर्यो | माम् | उपादाय | वीर्यवान्
अगच्छत् | तां | सभां | ब्राह्मीं | विपापां | विगम् + क्लम
एवंरूपेति सा शक्या निर्देष्टुं जनाधिप क्षणेन हि बिभर्त्यन्यदनिर्देश्यं वपुस्तथा
View Padaccheda
एवंरूप + इति | सा | शक्या | न | निर्देष्टुं | जनाधिप
क्षणेन | हि | भृ + अन्य | अनिर्देश्यं | वपुस् + तथा
वेद परिमाणं वा संस्थानं वापि भारत रूपं मया तादृग्दृष्टपूर्वं कदाचन
View Padaccheda
न | वेद | परिमाणं | वा | संस्थानं | वा + अपि | भारत
न | च | रूपं | मया | तादृग् | दृश् + पूर्व | कदाचन
सुसुखा सा सभा राजन्न शीता घर्मदा क्षुत्पिपासे ग्लानिं प्राप्य तां प्राप्नुवन्त्युत
View Padaccheda
सा | सभा | सुख + संस्पर्श | न | शीता | न | च | घर्म + द
न | क्षुध् + पिपासा | न | ग्लानिं | प्राप्य | तां | प्राप् + उत
नानारूपैरिव कृता सुविचित्रैः सुभास्वरैः स्तम्भैर्न धृता सा तु शाश्वती सा क्षरा
View Padaccheda
नानारूपैर् | इव | कृता | सु + विचित्र | सु + भास्वर
स्तम्भैर् | न | च | धृता | सा | तु | शाश्वती | न | च | सा | क्षरा
अति चन्द्रं सूर्यं शिखिनं स्वयंप्रभा दीप्यते नाकपृष्ठस्था भासयन्तीव भास्करम्
View Padaccheda
अति | चन्द्रं | च | सूर्यं | च | शिखिनं | च | स्वयंप्रभा
दीप्यते | नाक + पृष्ठ + स्थ | भासय् + इव | भास्करम्
तस्यां भगवानास्ते विदधद्देवमायया स्वयमेकोऽनिशं राजँल्लोकाँल्लोकपितामहः
View Padaccheda
तस्यां | स | भगवान् | आस्ते | विदधद् | देव + माया
स्वयम् | एको | ऽनिशं | राजंल् | लोकांल् | लोकपितामहः
उपतिष्ठन्ति चाप्येनं प्रजानां पतयः प्रभुम् दक्षः प्रचेताः पुलहो मरीचिः कश्यपस्तथा
View Padaccheda
उपतिष्ठन्ति | च + अपि + एनद् | प्रजानां | पतयः | प्रभुम्
दक्षः | प्रचेताः | पुलहो | मरीचिः | कश्यप + तथा
भृगुरत्रिर्वसिष्ठश्च गौतमश्च तथाङ्गिराः मनोऽन्तरिक्षं विद्याश्च वायुस्तेजो जलं मही
View Padaccheda
भृगुर् | अत्रिर् | वसिष्ठ + च | गौतम + च | तथा + अङ्गिरस्
मनो | ऽन्तरिक्षं | विद्या + च | वायु + तेजस् | जलं | मही
शब्दः स्पर्शस्तथा रूपं रसो गन्धश्च भारत प्रकृतिश्च विकारश्च यच्चान्यत्कारणं भुवः
View Padaccheda
शब्दः | स्पर्श + तथा | रूपं | रसो | गन्ध + च | भारत
प्रकृति + च | विकार + च | यद् + च + अन्य | कारणं | भुवः
चन्द्रमाः सह नक्षत्रैरादित्यश्च गभस्तिमान् वायवः क्रतवश्चैव संकल्पः प्राण एव
View Padaccheda
चन्द्रमाः | सह | नक्षत्रैर् | आदित्य + च | गभस्तिमान्
वायवः | क्रतु + च + एव | संकल्पः | प्राण | एव | च
एते चान्ये बहवः स्वयंभुवमुपस्थिताः अर्थो धर्मश्च कामश्च हर्षो द्वेषस्तपो दमः
View Padaccheda
एते | च + अन्य | च | बहवः | कुमारा | बहु + विक्रम
अर्थो | धर्म + च | काम + च | वसुः | कपिल | एव | च
आयान्ति तस्यां सहिता गन्धर्वाप्सरसस्तथा विंशतिः सप्त चैवान्ये लोकपालाश्च सर्वशः
View Padaccheda
चित्रसेनः | सहामात्यो | गन्धर्व + अप्सरस् + तथा
विंशतिः | सप्त | च + एव + अन्य | लोकपाल + च | सर्वशः
शुक्रो बृहस्पतिश्चैव बुधोऽङ्गारक एव शनैश्चरश्च राहुश्च ग्रहाः सर्वे तथैव
View Padaccheda
शुक्रो | बृहस्पति + च + एव | बुधो | ऽङ्गारक | एव | च
शनैश्चर + च | राहु + च | ग्रहाः | सर्वे | तथा + एव | च
मन्त्रो रथंतरश्चैव हरिमान्वसुमानपि आदित्याः साधिराजानो नानाद्वंद्वैरुदाहृताः
View Padaccheda
मन्त्रो | रथंतर + च + एव | हरिमान् | वसुमान् | अपि
आदित्याः | नाना + द्वंद्व | उदाहृताः
मरुतो विश्वकर्मा वसवश्चैव भारत तथा पितृगणाः सर्वे सर्वाणि हवींष्यथ
View Padaccheda
मरुतो | विश्वकर्मा | च | वसु + च + एव | भारत
तथा | पितृ + गण | सर्वे | सर्वाणि | च | हविस् + अथ
ऋग्वेदः सामवेदश्च यजुर्वेदश्च पाण्डव अथर्ववेदश्च तथा पर्वाणि विशां पते
View Padaccheda
ऋग्वेदः | सामवेद + च | यजुर्वेद + च | पाण्डव
अथर्ववेद + च | तथा | पर्वाणि | च | विशां | पते
इतिहासोपवेदाश्च वेदाङ्गानि सर्वशः ग्रहा यज्ञाश्च सोमश्च दैवतानि सर्वशः
View Padaccheda
ब्राह्मं | वेदम् | अधीयाना | वेदाङ्गानि | च | सर्वशः
ग्रहा | यज्ञ + च | सोम + च | दैवतानि | च | सर्वशः
सावित्री दुर्गतरणी वाणी सप्तविधा तथा मेधा धृतिः श्रुतिश्चैव प्रज्ञा बुद्धिर्यशः क्षमा
View Padaccheda
सावित्री | दुर्ग + तरणी | वाणी | सप्तविधा | तथा
क्षमा | धृतिः | शुचि + च + एव | प्रज्ञा | बुद्धिः | स्मृतिर् | यशः
सामानि स्तुतिशस्त्राणि गाथाश्च विविधास्तथा भाष्याणि तर्कयुक्तानि देहवन्ति विशां पते
View Padaccheda
सामानि | स्तुति + शस्त्र | गाथा + च | विविध + तथा
भाष्याणि | तर्क + युज् | देहवन्ति | च | भारत
क्षणा लवा मुहूर्ताश्च दिवा रात्रिस्तथैव अर्धमासाश्च मासाश्च ऋतवः षट्च भारत
View Padaccheda
क्षणा | लवा | मुहूर्त + च | दिवा | रात्रि + तथा + एव | च
अर्ध + मास + च | मास + च | ऋतवः | षट् | च | भारत
संवत्सराः पञ्चयुगमहोरात्राश्चतुर्विधाः कालचक्रं यद्दिव्यं नित्यमक्षयमव्ययम्
View Padaccheda
संवत्सराः | पञ्चयुगम् | अहोरात्र + चतुर्विध
कालचक्रं | च | यद् | दिव्यं | नित्यम् | अक्षयम् | अव्ययम्
अदितिर्दितिर्दनुश्चैव सुरसा विनता इरा कालका सुरभिर्देवी सरमा चाथ गौतमी
View Padaccheda
अदितिर् | दितिर् | दनु + च + एव | सुरसा | विनता | इरा
कालिका | सुरभी | देवी | सरमा | च + एव | गौतमी
आदित्या वसवो रुद्रा मरुतश्चाश्विनावपि विश्वेदेवाश्च साध्याश्च पितरश्च मनोजवाः
View Padaccheda
आदित्या | वसवो | रुद्रा | मरुत् + च + अश्विन् + अपि
विश्वेदेव + च | साध्य + च | पितृ + च | मनोजवाः
राक्षसाश्च पिशाचाश्च दानवा गुह्यकास्तथा सुपर्णनागपशवः पितामहमुपासते
View Padaccheda
राक्षस + च | पिशाच + च | दानवा | गुह्यक + तथा
ऋषयः | सर्व | एव + एतद् | पितामहम् | उपासते
देवो नारायणस्तस्यां तथा देवर्षयश्च ये ऋषयो वालखिल्याश्च योनिजायोनिजास्तथा
View Padaccheda
देवो | नारायण + तद् | तथा | देवर्षि + च | ये
ऋषयो | वालखिल्य + च | योनिज + अयोनिज + तथा
यच्च किंचित्त्रिलोकेऽस्मिन्दृश्यते स्थाणुजङ्गमम् सर्वं तस्यां मया दृष्टं तद्विद्धि मनुजाधिप
View Padaccheda
यद् + च | किंचित् | त्रिलोके | ऽस्मिन् | दृश्यते | स्थाणु + जङ्गम
सर्वं | तस्यां | मया | दृष्टं | तद् | विद्धि | मनुज + अधिप
अष्टाशीतिसहस्राणि यतीनामूर्ध्वरेतसाम् प्रजावतां पञ्चाशदृषीणामपि पाण्डव
View Padaccheda
अष्टाशीति + सहस्र | यतीनाम् | ऊर्ध्वरेतसाम्
प्रजावतां | च | पञ्चाशद् | ऋषीणाम् | अपि | पाण्डव
ते स्म तत्र यथाकामं दृष्ट्वा सर्वे दिवौकसः प्रणम्य शिरसा तस्मै प्रतियान्ति यथागतम्
View Padaccheda
ते | स्म | तत्र | दृष्ट्वा | सर्वे | दिवौकसः
प्रणम्य | शिरसा | तस्मै | प्रतियान्ति | यथागतम्
अतिथीनागतान्देवान्दैत्यान्नागान्मुनींस्तथा यक्षान्सुपर्णान्कालेयान्गन्धर्वाप्सरसस्तथा
View Padaccheda
अतिथीन् | आगतान् | साधून् | बालान् | वृद्धान् | गुरु + तथा
यक्षान् | सुपर्णान् | कालेयान् | गन्धर्व + अप्सरस् + तथा
महाभागानमितधीर्ब्रह्मा लोकपितामहः दयावान्सर्वभूतेषु यथार्हं प्रतिपद्यते
View Padaccheda
महाभागान् | अमित + धी | ब्रह्मा | लोकपितामहः
दयावान् | सर्व + भूत | यथार्हं | प्रतिपद्यते
प्रतिगृह्य विश्वात्मा स्वयंभूरमितप्रभः सान्त्वमानार्थसंभोगैर्युनक्ति मनुजाधिप
View Padaccheda
प्रतिगृह्य | च | तत् | सर्वं | दृष्ट्वा | च + एव | स्वयंवरम्
सान्त्व + मान + अर्थ + सम्भोग | युनक्ति | मनुज + अधिप
तथा तैरुपयातैश्च प्रतियातैश्च भारत आकुला सा सभा तात भवति स्म सुखप्रदा
View Padaccheda
तथा | तैर् | उपया + च | प्रतिया + च | भारत
आकुला | सा | सभा | तात | भवति | स्म | सुख + प्रद
सर्वतेजोमयी दिव्या ब्रह्मर्षिगणसेविता ब्राह्म्या श्रिया दीप्यमाना शुशुभे विगतक्लमा
View Padaccheda
सर्व + तेजस् + मय | दिव्या | ब्रह्मर्षि + गण + सेव्
ब्राह्म्या | श्रिया | दीप्यमाना | शुशुभे | विगम् + क्लम
सा सभा तादृशी दृष्टा सर्वलोकेषु दुर्लभा सभेयं राजशार्दूल मनुष्येषु यथा तव
View Padaccheda
सा | सभा | तादृशी | राजन् + मद् | दृश् + अन्तरिक्ष + ग
सभा + इदम् | राजन् + शार्दूल | मनुष्येषु | यथा | तव
एता मया दृष्टपूर्वाः सभा देवेषु पाण्डव तवेयं मानुषे लोके सर्वश्रेष्ठतमा सभा
View Padaccheda
एता | मया | दृश् + पूर्व | सभा | देवेषु | पाण्डव
त्वद् + इदम् | मानुषे | लोके | सर्व + श्रेष्ठतम | सभा
प्रायशो राजलोकस्ते कथितो वदतां वर वैवस्वतसभायां तु यथा वदसि वै प्रभो
View Padaccheda
प्रायशो | राजन् + लोक + त्वद् | कथितो | वदतां | वर
वैवस्वत + सभा | तु | यथा | वदसि | वै | प्रभो
वरुणस्य सभायां तु नागास्ते कथिता विभो दैत्येन्द्राश्चैव भूयिष्ठाः सरितः सागरास्तथा
View Padaccheda
वरुणस्य | सभायां | तु | नाग + तद् | कथिता | विभो
दैत्य + इन्द्र + च + एव | भूयिष्ठाः | सरितः | सागर + तथा
तथा धनपतेर्यक्षा गुह्यका राक्षसास्तथा गन्धर्वाप्सरसश्चैव भगवांश्च वृषध्वजः
View Padaccheda
तथा | धनपतेर् | यक्षा | गुह्यका | राक्षस + तथा
गन्धर्व + अप्सरस् + च + एव | भगवत् + च | वृषध्वजः
पितामहसभायां तु कथितास्ते महर्षयः सर्वदेवनिकायाश्च सर्वशास्त्राणि चैव हि
View Padaccheda
पितामह + सभा | तु | कथय् + तद् | महत् + ऋषि
सर्व + देव + निकाय + च | सर्व + शास्त्र | च + एव | हि
शतक्रतुसभायां तु देवाः संकीर्तिता मुने उद्देशतश्च गन्धर्वा विविधाश्च महर्षयः
View Padaccheda
शतक्रतु + सभा | तु | देवाः | संकीर्तिता | मुने
उद्देश + च | गन्धर्वा | विविध + च | महत् + ऋषि
एक एव तु राजर्षिर्हरिश्चन्द्रो महामुने कथितस्ते सभानित्यो देवेन्द्रस्य महात्मनः
View Padaccheda
एक | एव | तु | राजर्षिर् | हरिश्चन्द्रो | महत् + मुनि
प्रतस्थे | नगरीं | रम्यां | द्रुपदस्य | महात्मनः
किं कर्म तेनाचरितं तपो वा नियतव्रतम् येनासौ सह शक्रेण स्पर्धते स्म महायशाः
View Padaccheda
किं | कर्म | तद् + आचर् | तपो | वा | नियम् + व्रत
यद् + अदस् | सह | शक्रेण | स्पर्धते | स्म | महत् + यशस्
पितृलोकगतश्चापि त्वया विप्र पिता मम दृष्टः पाण्डुर्महाभागः कथं चासि समागतः
View Padaccheda
पितृ + लोक + गम् | च + अपि | त्वया | विप्र | पिता | मम
दृष्टः | पाण्डुर् | महाभागः | कथं | च + अस् | समागतः
किमुक्तवांश्च भगवन्नेतदिच्छामि वेदितुम् त्वत्तः श्रोतुमहं सर्वं परं कौतूहलं हि मे
View Padaccheda
किम् | वच् + च | भगवन्न् | एतद् | इच्छामि | वेदितुम्
श्रोतुम् | इच्छामहे | विप्र | परं | कौतूहलं | हि | नः
यन्मां पृच्छसि राजेन्द्र हरिश्चन्द्रं प्रति प्रभो तत्तेऽहं संप्रवक्ष्यामि माहात्म्यं तस्य धीमतः
View Padaccheda
यद् + मद् | पृच्छसि | राजन् + इन्द्र | हरिश्चन्द्रं | प्रति | प्रभो
तत् | ते | ऽहं | सम्प्रवक्ष्यामि | माहात्म्यं | तस्य | धीमतः
राजा बलवानासीत्सम्राट्सर्वमहीक्षिताम् तस्य सर्वे महीपालाः शासनावनताः स्थिताः
View Padaccheda
स | राजा | बलवान् | आसीत् | सम्राट् | सर्व + महीक्षित्
तस्य | सर्वे | महीपालाः | शासन + अवनम् | स्थिताः
तेनैकं रथमास्थाय जैत्रं हेमविभूषितम् शस्त्रप्रतापेन जिता द्वीपाः सप्त नरेश्वर
View Padaccheda
तद् + एक | रथम् | आस्थाय | जैत्रं | हेमन् + विभूषय्
शस्त्र + प्रताप | जिता | द्वीपाः | सप्त | नरेश्वर
विजित्य महीं सर्वां सशैलवनकाननाम् आजहार महाराज राजसूयं महाक्रतुम्
He defeated all the neighbouring potentates and chief tribes and thus accomplished all that was necessary for the king (Yudhishthira) to perform the great Rajasuya sacrifice.
View Padaccheda
स | विजित्य | महीं | सर्वां | स + शैल + वन + कानन
आजहार | महत् + राज | राजसूयं | महत् + क्रतु
तस्य सर्वे महीपाला धनान्याजह्रुराज्ञया द्विजानां परिवेष्टारस्तस्मिन्यज्ञे तेऽभवन्
View Padaccheda
तस्य | सर्वे | महीपालाः | शासन + अवनम् | स्थिताः
द्विजानां | परिवेष्टृ + तद् | यज्ञे | च | ते | ऽभवन्
प्रादाच्च द्रविणं प्रीत्या याजकानां नरेश्वरः यथोक्तं तत्र तैस्तस्मिंस्ततः पञ्चगुणाधिकम्
View Padaccheda
प्रदा + च | द्रविणं | प्रीत्या | याजकानां | नरेश्वरः
यथोक्तं | तत्र | तद् + ततस् | पञ्चन् + गुण + अधिक
अतर्पयच्च विविधैर्वसुभिर्ब्राह्मणांस्तथा प्रासर्पकाले संप्राप्ते नानादिग्भ्यः समागतान्
View Padaccheda
तर्पय् + च | विविधैर् | वसुभिर् | ब्राह्मण + तथा
तर्पयामास | विप्र + इन्द्र + नाना + दिश् | समागतान्
भक्ष्यैर्भोज्यैश्च विविधैर्यथाकामपुरस्कृतैः रत्नौघतर्पितैस्तुष्टैर्द्विजैश्च समुदाहृतम् तेजस्वी यशस्वी नृपेभ्योऽभ्यधिकोऽभवत्
View Padaccheda
भक्ष्यैर् | भोज्य + च | विविधैर् | यथाकाम + पुरस्कृ
रत्न + ओघ + तर्पय् + तुष् | द्विज + च | समुदाहृतम्
तेजस्वी | च | यशस्वी | च | नृपेभ्यो | ऽभ्यधिको | ऽभवत्
एतस्मात्कारणात्पार्थ हरिश्चन्द्रो विराजते तेभ्यो राजसहस्रेभ्यस्तद्विद्धि भरतर्षभ
View Padaccheda
एतस्मात् | कारणात् | पार्थ | हरिश्चन्द्रो | विराजते
तेभ्यो | राजन् + सहस्र + तद् | विद्धि | भरत + ऋषभ
समाप्य हरिश्चन्द्रो महायज्ञं प्रतापवान् अभिषिक्तः शुशुभे साम्राज्येन नराधिप
View Padaccheda
समाप्य | च | हरिश्चन्द्रो | महत् + यज्ञ | प्रतापवान्
अभिषिक्तः | स | शुशुभे | साम्राज्येन | नर + अधिप
ये चान्येऽपि महीपाला राजसूयं महाक्रतुम् यजन्ते ते महेन्द्रेण मोदन्ते सह भारत
View Padaccheda
आजहार | महत् + राज | राजसूयं | महत् + क्रतु
यजन्ते | ते | महत् + इन्द्र | मोदन्ते | सह | भारत
ये चापि निधनं प्राप्ताः संग्रामेष्वपलायिनः ते तत्सदः समासाद्य मोदन्ते भरतर्षभ
View Padaccheda
ये | च + अपि | निधनं | प्राप्ताः | संग्राम + अपलायिन्
ते | तद् + सदस् | समासाद्य | मोदन्ते | भरत + ऋषभ
तपसा ये तीव्रेण त्यजन्तीह कलेवरम् तेऽपि तत्स्थानमासाद्य श्रीमन्तो भान्ति नित्यशः
View Padaccheda
तपसा | ये | च | तीव्रेण | त्यज् + इह | कलेवरम्
ते | ऽपि | तत् | स्थानम् | आसाद्य | श्रीमन्तो | भान्ति | नित्यशः
पिता त्वाह कौन्तेय पाण्डुः कौरवनन्दनः हरिश्चन्द्रे श्रियं दृष्ट्वा नृपतौ जातविस्मयः
View Padaccheda
पिता | च | तु + अह् | कौन्तेय | पाण्डुः | कौरव + नन्दन
हरिश्चन्द्रे | श्रियं | दृष्ट्वा | नृपतौ | जन् + विस्मय
समर्थोऽसि महीं जेतुं भ्रातरस्ते वशे स्थिताः राजसूयं क्रतुश्रेष्ठमाहरस्वेति भारत
View Padaccheda
समर्थो | ऽसि | महीं | जेतुं | भ्रातृ + त्वद् | वशे | स्थिताः
राजसूयं | क्रतु + श्रेष्ठ | आहृ + इति | भारत
तस्य त्वं पुरुषव्याघ्र संकल्पं कुरु पाण्डव गन्तारस्ते महेन्द्रस्य पूर्वैः सह सलोकताम्
View Padaccheda
तस्य | त्वं | पुरुष + व्याघ्र | संकल्पं | कुरु | पाण्डव
गम् + त्वद् | महत् + इन्द्र | पूर्वे | सर्वे | पितामहाः
बहुविघ्नश्च नृपते क्रतुरेष स्मृतो महान् छिद्राण्यत्र हि वाञ्छन्ति यज्ञघ्ना ब्रह्मराक्षसाः
View Padaccheda
बहु + विघ्न + च | नृपते | क्रतुर् | एष | स्मृतो | महान्
छिद्र + अत्र | हि | वाञ्छन्ति | यज्ञ + घ्न | ब्रह्मराक्षसाः
युद्धं पृष्ठगमनं पृथिवीक्षयकारकम् किंचिदेव निमित्तं भवत्यत्र क्षयावहम्
View Padaccheda
युद्धं | च | पृष्ठ + गमन | पृथिवी + क्षय + कारक
किंचिद् | एव | निमित्तं | च | भू + अत्र | क्षय + आवह
एतत्संचिन्त्य राजेन्द्र यत्क्षमं तत्समाचर अप्रमत्तोत्थितो नित्यं चातुर्वर्ण्यस्य रक्षणे भव एधस्व मोदस्व दानैस्तर्पय द्विजान्
View Padaccheda
एतत् | संचिन्त्य | राजन् + इन्द्र | यत् | क्षमं | तत् | समाचर
एवं | यो | वर्तते | राजा | चातुर्वर्ण्यस्य | रक्षणे
भव | एधस्व | मोदस्व | दान + तर्पय् | च | द्विजान्
एतत्ते विस्तरेणोक्तं यन्मां त्वं परिपृच्छसि आपृच्छे त्वां गमिष्यामि दाशार्हनगरीं प्रति
View Padaccheda
धनंजय | निबुध् + इदम् | यन् | मां | त्वं | परिपृच्छसि
आपृच्छे | त्वां | गमिष्यामि | क्षिप्रम् | एष्यामि | च + अपि + मद्
एवमाख्याय पार्थेभ्यो नारदो जनमेजय जगाम तैर्वृतो राजन्नृषिभिर्यैः समागतः
View Padaccheda
एवम् | आख्याय | पार्थेभ्यो | नारदो | जनमेजय
जगाम | तैर् | वृतो | राजन्न् | ऋषिभिर् | यैः | समागतः
गते तु नारदे पार्थो भ्रातृभिः सह कौरव राजसूयं क्रतुश्रेष्ठं चिन्तयामास भारत
View Padaccheda
गते | तु | नारदे | पार्थो | भ्रातृभिः | सह | कौरव
राजसूयं | क्रतु + श्रेष्ठ | आहृ + इति | भारत