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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.11
(73 verses)
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Sanskrit Text
पिता
च
त्वाह
कौन्तेय
पाण्डुः
कौरवनन्दनः
।
हरिश्चन्द्रे
श्रियं
दृष्ट्वा
नृपतौ
जातविस्मयः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पिता | च | तु + अह् | कौन्तेय | पाण्डुः | कौरव + नन्दन
हरिश्चन्द्रे | श्रियं | दृष्ट्वा | नृपतौ | जन् + विस्मय
हरिश्चन्द्रे | श्रियं | दृष्ट्वा | नृपतौ | जन् + विस्मय