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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.72
(48 verses)
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Sanskrit Text
न
मित्रध्रुङ्नैकृतिकः
कृतघ्नः;
शठोऽनृजुर्धर्मविद्वेषकश्च
।
न
ब्रह्महा
मनसापि
प्रपश्ये;द्गवां
लोकं
पुण्यकृतां
निवासम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | मित्र + द्रुह् | नैकृतिकः | कृतघ्नः | शठो | ऽनृजुर् | धर्म + विद्वेषक + च
न | ब्रह्मन् + हन् | मनस् + अपि | प्रपश्येद् | गवां | लोकं | पुण्य + कृत् | निवासम्
न | ब्रह्मन् + हन् | मनस् + अपि | प्रपश्येद् | गवां | लोकं | पुण्य + कृत् | निवासम्