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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.143
(44 verses)
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Sanskrit Text
स
लङ्घयन्वै
सरितो
जिघांस;न्स
तं
वज्रं
प्रहरन्तं
निरास
।
स
महेन्द्रः
स्तूयते
वै
महाध्वरे;
विप्रैरेको
ऋक्सहस्रैः
पुराणैः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | लङ्घयन् | वै | सरितो | जिघांसन् | स | तं | वज्रं | प्रहरन्तं | निरास
स | महत् + इन्द्र | स्तूयते | वै | महत् + अध्वर | विप्रैर् | एको | ऋच् + सहस्र | पुराणैः
स | महत् + इन्द्र | स्तूयते | वै | महत् + अध्वर | विप्रैर् | एको | ऋच् + सहस्र | पुराणैः