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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.143
(44 verses)
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Sanskrit Text
स
विहायो
व्यदधात्पञ्चनाभिः;
स
निर्ममे
गां
दिवमन्तरिक्षम्
।
एवं
रम्यानसृजत्पर्वतांश्च;
हृषीकेशोऽमितदीप्ताग्नितेजाः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | विहायो | व्यदधात् | पञ्चन् + नाभि | स | निर्ममे | गां | दिवम् | अन्तरिक्षम्
एवं | रम्यान् | असृजत् | पर्वत + च | हृषीकेशो | अमित + दीप् + अग्नि + तेजस्
एवं | रम्यान् | असृजत् | पर्वत + च | हृषीकेशो | अमित + दीप् + अग्नि + तेजस्