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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.143
(44 verses)
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Sanskrit Text
स
कुम्भरेताः
ससृजे
पुराणं;
यत्रोत्पन्नमृषिमाहुर्वसिष्ठम्
।
स
मातरिश्वा
विभुरश्ववाजी;
स
रश्मिमान्सविता
चादिदेवः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | कुम्भरेताः | ससृजे | पुराणं | यत्र + उत्पद् | ऋषिम् | आहुर् | वसिष्ठम्
स | मातरिश्वा | विभुर् | अश्व + वाजिन् | स | रश्मिमान् | सविता | च + आदिदेव
स | मातरिश्वा | विभुर् | अश्व + वाजिन् | स | रश्मिमान् | सविता | च + आदिदेव