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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.56
(60 verses)
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Sanskrit Text
विनश्यमानं
धर्मं
हि
यो
रक्षति
स
धर्मवित्
।
न
तेन
भ्रूणहा
स
स्यान्मन्युस्तं
मनुमृच्छति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
धर्मं | विनश्यमानं | हि | यो | न | रक्षेत् | स | धर्म + हन्
न | तेन | ब्रह्मन् + हन् | स | अस् + मन्यु + तद् | मन्युम् | ऋच्छति
न | तेन | ब्रह्मन् + हन् | स | अस् + मन्यु + तद् | मन्युम् | ऋच्छति