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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.314
(49 verses)
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Sanskrit Text
शक्तिर्न्यस्ता
क्षितितले
त्रैलोक्यमवमन्य
वै
।
यत्रोवाच
जगत्स्कन्दः
क्षिपन्वाक्यमिदं
तदा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शक्तिर् | न्यस्ता | क्षिति + तल | त्रैलोक्यम् | अवमन्य | वै
यत्र + वच् | जगन्त् + स्कन्द | क्षिपन् | वाक्यम् | इदं | तदा
यत्र + वच् | जगन्त् + स्कन्द | क्षिपन् | वाक्यम् | इदं | तदा