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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.117
(44 verses)
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Sanskrit Text
दृष्ट्वा
च
सोऽनशत्सिंहो
वन्यो
भीसन्नवाग्बलः
।
स
चाश्रमेऽवसत्सिंहस्तस्मिन्नेव
वने
सुखी
॥
Padaccheda (Word Analysis)
दृष्ट्वा | च | सो | ऽनशत् | सिंहो | वन्यो | भी + सद् + वाच् + बल
स | च + आश्रम | ऽवसत् | सिंह + तद् | एव | वने | सुखी
स | च + आश्रम | ऽवसत् | सिंह + तद् | एव | वने | सुखी