Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.105
(53 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
ईर्ष्यातिच्छेदसंपन्ना
राजन्पुरुषमानिनः
।
कच्चित्त्वं
न
तथा
प्राज्ञ
मत्सरी
कोसलाधिप
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ईर्ष्या + अति + छेद + सम्पद् | राजन् | पुरुष + मानिन्
कच्चित् | त्वं | न | तथा | प्राज्ञ | मत्सरी | कोसल + अधिप
कच्चित् | त्वं | न | तथा | प्राज्ञ | मत्सरी | कोसल + अधिप