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Currently viewing: Parva 10 -
Chapter 10.8
(151 verses)
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Sanskrit Text
तेषामार्तस्वरं
श्रुत्वा
वित्रस्ता
गजवाजिनः
।
मुक्ताः
पर्यपतन्राजन्मृद्नन्तः
शिबिरे
जनम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तेषाम् | आर्त + स्वर | श्रुत्वा | वित्रस्ता | गज + वाजिन्
मुक्ताः | पर्यपतन् | राजन् + मृद् | शिबिरे | जनम्
मुक्ताः | पर्यपतन् | राजन् + मृद् | शिबिरे | जनम्