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Currently viewing: Parva 10 -
Chapter 10.8
(151 verses)
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Sanskrit Text
बन्धनानि
च
राजेन्द्र
संछिद्य
तुरगा
द्विपाः
।
समं
पर्यपतंश्चान्ये
कुर्वन्तो
महदाकुलम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
बन्धनानि | च | राजन् + इन्द्र | संछिद्य | तुरगा | द्विपाः
समं | परिपत् + च + अन्य | कुर्वन्तो | महद् | आकुलम्
समं | परिपत् + च + अन्य | कुर्वन्तो | महद् | आकुलम्