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Currently viewing: Parva 10 -
Chapter 10.8
(151 verses)
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Sanskrit Text
असंशयं
हि
कालस्य
पर्यायो
दुरतिक्रमः
।
तादृशा
निहता
यत्र
कृत्वास्माकं
जनक्षयम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
असंशयं | हि | कालस्य | पर्यायो | दुरतिक्रमः
तादृशा | निहता | यत्र | कृ + मद् | जन + क्षय
तादृशा | निहता | यत्र | कृ + मद् | जन + क्षय