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Currently viewing: Parva 10 -
Chapter 10.6
(34 verses)
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Sanskrit Text
ब्रुवतामप्रियं
पथ्यं
सुहृदां
न
शृणोति
यः
।
स
शोचत्यापदं
प्राप्य
यथाहमतिवर्त्य
तौ
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ब्रुवताम् | अप्रियं | पथ्यं | सुहृदां | न | शृणोति | यः
स | शुच् + आपद् | प्राप्य | यथा + मद् | अतिवर्त्य | तौ
स | शुच् + आपद् | प्राप्य | यथा + मद् | अतिवर्त्य | तौ