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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.63
(26 verses)
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Sanskrit Text
तत्र
तत्र
च
विप्रेन्द्रैः
स्तूयमानः
समन्ततः
।
निर्ययौ
परया
प्रीत्या
वनं
मृगजिघांसया
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत्र | तत्र | च | विप्र + इन्द्र | स्तूयमानः | समन्ततः
निर्ययौ | परया | प्रीत्या | वनं | मृग + जिघांसा
निर्ययौ | परया | प्रीत्या | वनं | मृग + जिघांसा