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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.218
(50 verses)
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Sanskrit Text
समुत्पाट्य
तु
पाणिभ्यां
मन्दराच्छिखरं
महत्
।
सद्रुमं
व्यसृजच्छक्रो
जिघांसुः
पाण्डुनन्दनम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
समुत्पाट्य | तु | पाणिभ्यां | मन्दर + शिखर | महत्
स + द्रुम | विसृज् + शक्र | जिघांसुः | पाण्डु + नन्दन
स + द्रुम | विसृज् + शक्र | जिघांसुः | पाण्डु + नन्दन