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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.216
(34 verses)
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Sanskrit Text
मौर्व्यां
तु
युज्यमानायां
बलिना
पाण्डवेन
ह
।
येऽशृण्वन्कूजितं
तत्र
तेषां
वै
व्यथितं
मनः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
मौर्व्यां | तु | युज्यमानायां | बलिना | पाण्डवेन | ह
ये | ऽशृण्वन् | कूजितं | तत्र | तेषां | वै | व्यथितं | मनः
ये | ऽशृण्वन् | कूजितं | तत्र | तेषां | वै | व्यथितं | मनः