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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.194
(25 verses)
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Sanskrit Text
आर्यवृत्तश्च
पाञ्चाल्यो
न
स
राजा
धनप्रियः
।
न
संत्यक्ष्यति
कौन्तेयान्राज्यदानैरपि
ध्रुवम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
आर्य + वृत् + च | पाञ्चाल्यो | न | स | राजा | धन + प्रिय
न | संत्यक्ष्यति | कौन्तेयान् | राज्य + दान | अपि | ध्रुवम्
न | संत्यक्ष्यति | कौन्तेयान् | राज्य + दान | अपि | ध्रुवम्