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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.194
(25 verses)
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Sanskrit Text
जातपक्षा
विदेशस्था
विवृद्धाः
सर्वशोऽद्य
ते
।
नोपायसाध्याः
कौन्तेया
ममैषा
मतिरच्युत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
जन् + पक्ष | विदेश + स्थ | विवृद्धाः | सर्वशो | ऽद्य | ते
न + उपाय + साध् | कौन्तेया | मद् + एतद् | मतिर् | अच्युत
न + उपाय + साध् | कौन्तेया | मद् + एतद् | मतिर् | अच्युत