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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.188
(22 verses)
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Sanskrit Text
न
तु
धर्मस्य
सूक्ष्मत्वाद्गतिं
विद्मः
कथंचन
।
अधर्मो
धर्म
इति
वा
व्यवसायो
न
शक्यते
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | तु | धर्मस्य | सूक्ष्म + त्व | गतिं | विद्मः | कथंचन
अधर्मो | धर्म | इति | वा | व्यवसायो | न | शक्यते
अधर्मो | धर्म | इति | वा | व्यवसायो | न | शक्यते