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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.180
(22 verses)
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Sanskrit Text
तमब्रवीन्निर्मलतोयदाभो;
हलायुधोऽनन्तरजं
प्रतीतः
।
प्रीतोऽस्मि
दिष्ट्या
हि
पितृष्वसा
नः;
पृथा
विमुक्ता
सह
कौरवाग्र्यैः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तम् | अब्रवीन् | निर्मल + तोयद + आभ | हलायुधो | ऽनन्तरजं | प्रतीतः
प्रीतो | ऽस्मि | दिष्ट्या | हि | पितृष्वसा | नः | पृथा | विमुक्ता | सह | कौरव + अग्र्य
प्रीतो | ऽस्मि | दिष्ट्या | हि | पितृष्वसा | नः | पृथा | विमुक्ता | सह | कौरव + अग्र्य