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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.172
(17 verses)
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Sanskrit Text
रक्षसां
च
समुच्छेद
एष
तात
तपस्विनाम्
।
निमित्तभूतस्त्वं
चात्र
क्रतौ
वासिष्ठनन्दन
।
स
सत्रं
मुञ्च
भद्रं
ते
समाप्तमिदमस्तु
ते
॥
Padaccheda (Word Analysis)
रक्षसां | च | समुच्छेद | एष | तात | तपस्विनाम्
निमित्त + भू + त्वद् | च + अत्र | क्रतौ | वासिष्ठ + नन्दन
स | सत्रं | मुञ्च | भद्रं | ते | समाप्तम् | इदम् | अस्तु | ते
निमित्त + भू + त्वद् | च + अत्र | क्रतौ | वासिष्ठ + नन्दन
स | सत्रं | मुञ्च | भद्रं | ते | समाप्तम् | इदम् | अस्तु | ते