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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.166
(45 verses)
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Sanskrit Text
स
समुद्रोर्मिवेगेन
स्थले
न्यस्तो
महामुनिः
।
जगाम
स
ततः
खिन्नः
पुनरेवाश्रमं
प्रति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | समुद्र + ऊर्मि + वेग | स्थले | न्यस्तो | महत् + मुनि
जगाम | स | ततः | खिन्नः | पुनर् | एव + आश्रम | प्रति
जगाम | स | ततः | खिन्नः | पुनर् | एव + आश्रम | प्रति