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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.159
(22 verses)
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Sanskrit Text
अनग्नयोऽनाहुतयो
न
च
विप्रपुरस्कृताः
।
यूयं
ततो
धर्षिताः
स्थ
मया
पाण्डवनन्दन
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अन् + अग्नि | अन् + आहुति | न | च | विप्र + पुरस्कृ
यूयं | ततो | धर्षिताः | स्थ | मया | पाण्डव + नन्दन
यूयं | ततो | धर्षिताः | स्थ | मया | पाण्डव + नन्दन