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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.155
(52 verses)
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Sanskrit Text
क्षत्रोच्छेदाय
विहितो
जामदग्न्य
इवास्थितः
।
तस्य
ह्यस्त्रबलं
घोरमप्रसह्यं
नरैर्भुवि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
क्षत्र + उच्छेद | विहितो | जामदग्न्य | इव + आस्था
तस्य | हि + अस्त्र + बल | घोरम् | अप्रसह्यं | नरैर् | भुवि
तस्य | हि + अस्त्र + बल | घोरम् | अप्रसह्यं | नरैर् | भुवि