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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.155
(52 verses)
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Sanskrit Text
अभितः
सोऽथ
कल्माषीं
गङ्गाकूले
परिभ्रमन्
।
ब्राह्मणावसथं
पुण्यमाससाद
महीपतिः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अभितः | सो | ऽथ | कल्माषीं | गङ्गा + कूल | परिभ्रमन्
ब्राह्मण + आवसथ | पुण्यम् | आससाद | महीपतिः
ब्राह्मण + आवसथ | पुण्यम् | आससाद | महीपतिः