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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.117
(33 verses)
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Sanskrit Text
पाण्डोरवभृथं
कृत्वा
देवकल्पा
महर्षयः
।
ततो
मन्त्रमकुर्वन्त
ते
समेत्य
तपस्विनः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पाण्डोर् | अवभृथं | कृत्वा | देव + कल्प | महत् + ऋषि
ततो | मन्त्रम् | अकुर्वन्त | ते | समेत्य | तपस्विनः
ततो | मन्त्रम् | अकुर्वन्त | ते | समेत्य | तपस्विनः