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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.116
(31 verses)
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Sanskrit Text
प्रहृष्टमनसं
तत्र
विहरन्तं
यथामरम्
।
तं
माद्र्यनुजगामैका
वसनं
बिभ्रती
शुभम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
प्रहृष् + मनस् | तत्र | विहरन्तं | यथा + अमर
तं | माद्री + अनुगम् + एक | वसनं | बिभ्रती | शुभम्
तं | माद्री + अनुगम् + एक | वसनं | बिभ्रती | शुभम्