Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.116
(31 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
जलस्थानैश्च
विविधैः
पद्मिनीभिश्च
शोभितम्
।
पाण्डोर्वनं
तु
संप्रेक्ष्य
प्रजज्ञे
हृदि
मन्मथः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
जलस्थान + च | विविधैः | पद्मिनी + च | शोभितम्
पाण्डोर् | वनं | तु | सम्प्रेक्ष्य | प्रजज्ञे | हृदि | मन्मथः
पाण्डोर् | वनं | तु | सम्प्रेक्ष्य | प्रजज्ञे | हृदि | मन्मथः