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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.116
(31 verses)
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Sanskrit Text
जीवितान्ताय
कौरव्यो
मन्मथस्य
वशं
गतः
।
शापजं
भयमुत्सृज्य
जगामैव
बलात्प्रियाम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
जीवितान्ताय | कौरव्यो | मन्मथस्य | वशं | गतः
शाप + ज | भयम् | उत्सृज्य | गम् + एव | बलात् | प्रियाम्
शाप + ज | भयम् | उत्सृज्य | गम् + एव | बलात् | प्रियाम्