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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.114
(66 verses)
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Sanskrit Text
सा
बलिं
त्वरिता
देवी
धर्मायोपजहार
ह
।
जजाप
जप्यं
विधिवद्दत्तं
दुर्वाससा
पुरा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सा | बलिं | त्वरिता | देवी | धर्म + उपहृ | ह
जजाप | जप्यं | विधिवद् | दत्तं | दुर्वाससा | पुरा
जजाप | जप्यं | विधिवद् | दत्तं | दुर्वाससा | पुरा