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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.112
(34 verses)
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Sanskrit Text
त्वया
हीना
क्षणमपि
नाहं
जीवितुमुत्सहे
।
प्रसादं
कुरु
मे
राजन्नितस्तूर्णं
नयस्व
माम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
त्वया | हीना | क्षणम् | अपि | न + मद् | जीवितुम् | उत्सहे
प्रसादं | कुरु | मे | ब्रह्मञ् | जरा + इदम् | मा | विशेत | माम्
प्रसादं | कुरु | मे | ब्रह्मञ् | जरा + इदम् | मा | विशेत | माम्