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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.112
(34 verses)
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Sanskrit Text
न
मामर्हसि
धर्मज्ञ
वक्तुमेवं
कथंचन
।
धर्मपत्नीमभिरतां
त्वयि
राजीवलोचन
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | माम् | अर्हसि | धर्म + ज्ञ | त्यक्तुं | भक्ताम् | अनागसम्
धर्म + पत्नी | अभिरतां | त्वयि | राजीव + लोचन
धर्म + पत्नी | अभिरतां | त्वयि | राजीव + लोचन