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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.103
(17 verses)
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Sanskrit Text
अचक्षुरिति
तत्रासीत्सुबलस्य
विचारणा
।
कुलं
ख्यातिं
च
वृत्तं
च
बुद्ध्या
तु
प्रसमीक्ष्य
सः
।
ददौ
तां
धृतराष्ट्राय
गान्धारीं
धर्मचारिणीम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
इति | तत्र + अस् | सुबलस्य | विचारणा
कुलं | ख्यातिं | च | वृत्तं | च | बुद्ध्या | तु | प्रसमीक्ष्य | सः
ददौ | तां | धृतराष्ट्राय | गान्धारीं | धर्म + चारिन्
कुलं | ख्यातिं | च | वृत्तं | च | बुद्ध्या | तु | प्रसमीक्ष्य | सः
ददौ | तां | धृतराष्ट्राय | गान्धारीं | धर्म + चारिन्