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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.100
(30 verses)
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Sanskrit Text
ततस्तेनैव
विधिना
महर्षिस्तामपद्यत
।
अम्बालिकामथाभ्यागादृषिं
दृष्ट्वा
च
सापि
तम्
।
विषण्णा
पाण्डुसंकाशा
समपद्यत
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततस् + तद् + एव | विधिना | महत् + ऋषि + तद् | अपद्यत
अम्बालिकाम् | अथ + अभ्यागा | ऋषिं | दृष्ट्वा | च | तद् + अपि | तम्
विषण्णा | पाण्डु + संकाश | समपद्यत | भारत
अम्बालिकाम् | अथ + अभ्यागा | ऋषिं | दृष्ट्वा | च | तद् + अपि | तम्
विषण्णा | पाण्डु + संकाश | समपद्यत | भारत