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Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.68
(63 verses)
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Sanskrit Text
शरप्रहाराभिहतैर्महाबलै;रवेक्ष्यमाणैः
पतितैः
सहस्रशः
।
प्रनष्टसंज्ञैः
पुनरुच्छ्वसद्भि;र्मही
बभूवानुगतैरिवाग्निभिः
।
दिवश्च्युतैर्भूरतिदीप्तिमद्भि;र्नक्तं
ग्रहैर्द्यौरमलेव
दीप्तैः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शर + प्रहार + अभिहन् | महत् + बल | अवेक्ष्यमाणैः | पतितैः | सहस्रशः
प्रणश् + संज्ञा | पुनर् | उच्छ्वसद्भिर् | मही | भू + अनुगम् | इव + अग्नि
दिवश् | च्युतैर् | भूर् | अति + दीप्तिमत् | नक्तं | ग्रहैर् | द्यौर् | अमल + इव | दीप्तैः
प्रणश् + संज्ञा | पुनर् | उच्छ्वसद्भिर् | मही | भू + अनुगम् | इव + अग्नि
दिवश् | च्युतैर् | भूर् | अति + दीप्तिमत् | नक्तं | ग्रहैर् | द्यौर् | अमल + इव | दीप्तैः