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Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.61
(17 verses)
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Sanskrit Text
असिं
समुद्धृत्य
शितं
सुधारं;
कण्ठे
समाक्रम्य
च
वेपमानम्
।
उत्कृत्य
वक्षः
पतितस्य
भूमा;वथापिबच्छोणितमस्य
कोष्णम्
।
आस्वाद्य
चास्वाद्य
च
वीक्षमाणः;
क्रुद्धोऽतिवेलं
प्रजगाद
वाक्यम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
असिं | समुद्धृत्य | शितं | सु + धारा | कण्ठे | समाक्रम्य | च | वेपमानम्
उत्कृत्य | वक्षः | पतितस्य | भूमाव् | अथ + पा + शोणित | अस्य | कोष्णम्
आस्वाद्य | च + आस्वादय् | च | वीक्षमाणः | क्रुद्धो | ऽतिवेलं | प्रजगाद | वाक्यम्
उत्कृत्य | वक्षः | पतितस्य | भूमाव् | अथ + पा + शोणित | अस्य | कोष्णम्
आस्वाद्य | च + आस्वादय् | च | वीक्षमाणः | क्रुद्धो | ऽतिवेलं | प्रजगाद | वाक्यम्